आईना देख ये लगा कहने इश्क़-ए-बे-जा भी मुब्तला न हुआ

“Looking into the mirror, he began to say: even this misplaced love was never truly consumed.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

आईने में देखकर वह कहने लगा कि यह बेजा इश्क़ भी पूरी तरह मुब्तला नहीं हो सका।

विस्तार

आईने में खुद को देखना हमेशा अपने सच से रूबरू होने जैसा होता है। यहाँ आशिक जब अपनी सूरत देखता है, तो उसे एक अजीब सी मायूसी और तंज़ का अहसास होता है कि जिस बे-बुनियाद इश्क़ में उसने दिल लगाया, उसने भी उस पर कोई गहरा असर नहीं छोड़ा। यह शेर उस दर्द को बयान करता है जहाँ इंसान को इस बात का अफ़सोस होता है कि उसका इश्क़ इतना कच्चा निकला कि उसे मुकम्मल तौर पर बर्बाद भी न कर सका।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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