“This is the only fruit of life I reaped: thank God, no soul was left displeased with me.”
मैंने अपनी ज़िंदगी का यह फल पाया कि ईश्वर का शुक्र है मुझसे कभी कोई नाराज़ या ख़फ़ा नहीं हुआ।
शायर यहाँ अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई का हिसाब बेहद सादगी और नफ़ासत से पेश कर रहा है। उसने दौलत या शोहरत को जीवन का फल (समर) नहीं माना, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि उसके किसी अमल से किसी का दिल नहीं दुखा। यह शेर बड़ी ख़ूबसूरती से यह पैग़ाम देता है कि बिना किसी को रंज दिए प्यार से जी लेना ही ज़िंदगी की सबसे सच्ची जीत है।
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