आबला आबला हुए सब उज़्व नख़्ल-ए-उल्फ़त ने ये समर देखा

“Every limb broke out in blisters—such was the fruit the tree of love bore.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

शरीर का हर अंग छालों से भर गया; प्यार के दरख़्त पर यही फल लगा।

विस्तार

इस शेर में शायर ने मुहब्बत को एक दरख़्त (नख़्ल-ए-उल्फ़त) की तरह पेश किया है, जिससे अमूमन मीठे फलों की उम्मीद होती है। मगर इस अनोखे पेड़ ने अपने फल के रूप में आशिक़ के जिस्म के हर अंग को छालों और आबलों से भर दिया। ये आबले ही इश्क़ की तपन और दर्दनाक सफ़र का नतीजा हैं, जो बड़ी ख़ूबसूरती से यह बयान करते हैं कि वफ़ा के बदले अक्सर सिर्फ़ तकलीफ़ और ज़ख़्म ही हासिल होते हैं।

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