“Quietly, softly, deep within, O hidden longing of mine, you have made my heart the confidant of beauty concealed and divine.”
हे मेरे छिपे हुए शौक़, तूने चुपचाप और अंदर ही अंदर मेरे दिल को उस गुप्त सौंदर्य का राज़दार बना दिया है।
यहाँ शायर अपने दिल में दबी उस खामोश और छुपी हुई चाहत से मुख़ातिब है, जो बिना किसी शोर के अंदर ही अंदर पलती रही। इस छुपे हुए इश्क़ ने आशिक़ के दिल को इतना पाकीज़ा बना दिया है कि वह महबूब के अनदेखे हुस्न और उसकी नज़ाकतों का राज़दार बन गया है। यह शेर इज़हार के शोर से दूर, मोहब्बत के उस गहरे और रूहानी एहसास को छूता है जहाँ चाहत दिल की गहराइयों में एक पवित्र भेद की तरह महफ़ूज़ रहती है।
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