जिन की उस्तादी पे ख़ुद हिकमत बजा करती थी नाज़ एक उम्मी ने उन्हें तिफ़्ल-ए-दबिस्ताँ कर दिया

“Those upon whose mastery wisdom itself took rightful pride, were turned to mere schoolroom novices by an unlettered guide.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

जिनकी उस्तादी और विद्वता पर स्वयं ज्ञान व दर्शन को गर्व था, एक उम्मी (अनपढ़ कहे जाने वाले पैगंबर) ने उन्हें पाठशाला के छोटे बच्चों जैसा बना दिया।

विस्तार

इस शेर में दुनियावी अक़्ल और रूहानी हिकमत के बीच का फ़र्क़ बड़ी ख़ूबसूरती से उभारा गया है। शायर कहता है कि जिन बड़े-बड़े दार्शनिकों और आलिमों की महारत पर ख़ुद ज्ञान को नाज़ था, वे एक 'उम्मी' (जिन्होंने कोई दुनियावी तालीम नहीं ली, यानी हज़रत मुहम्मद) के सामने ऐसे हो गए जैसे पाठशाला के छोटे बच्चे हों। यह तशबीह सिखाती है कि इंसानी फ़लसफ़ा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, जब ख़ुदा की अता की हुई सच्ची रोशनी सामने आती है, तो सब उसके आगे झुक जाते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.