जोश-ए-वहशत की मिरे देखो अजाइब कारियाँ दश्त को ज़र्रा तो ज़र्रा को बयाबाँ कर दिया

“Behold the wondrous marvels wrought by my frenzy's wild despair: it shrank the desert to a speck of dust, and made a speck a boundless wilderness.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

मेरी दीवानगी के जोश का अनोखा करिश्मा देखो कि इसने पूरे रेगिस्तान को एक मामूली कण बना दिया और एक कण को विशाल बियाबान में बदल दिया।

विस्तार

इस शेर में आशिक अपनी दीवानगी और वहशत के कमाल का ज़िक्र कर रहा है। जुनून की हालत में नज़र का पैमाना ही बदल जाता है—इश्क़ का सैलाब इतना बेपनाह है कि वो एक विशाल रेगिस्तान को धूल का छोटा सा ज़र्रा बना देता है, और कभी तन्हाई के दर्द में एक नन्हा सा ज़र्रा भी अंतहीन वीराने जैसा फैल जाता है। यह इस बात की खूबसूरत मिसाल है कि जब दिल जज़्बात से भर जाता है, तो बाहर की कायनात इंसान के अंदरूनी एहसास के आगे बहुत छोटी या बेहद बड़ी लगने लगती है।

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