मैं हूँ रिंद-ए-पाक-बातिन दामन-ए-तर को न देख दुख़्तर-ए-रज़ को भी मैं ने पाक-दामाँ कर दिया

“Look not upon my wine-soaked hem, I am a drinker pure within; even the daughter of the vine, my touch has rendered chaste and clean.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

मेरे शराब से भीगे दामन को मत देखो क्योंकि मेरा अंतर्मन पवित्र है। मैंने तो शराब (अंगूर की बेटी) को भी छूकर पवित्र बना दिया है।

विस्तार

शायर कहता है कि मेरे शराब से भीगे दामन को देखकर मुझे गुनहगार मत समझो, क्योंकि मेरा अंतर्मन पूरी तरह साफ़ और पाक़ीज़ा है। उसका रूहानी इश्क़ इतना गहरा है कि उसने 'दुख़्तर-ए-रज़' (अंगूर की बेटी यानी शराब) जैसी बदनाम चीज़ को भी अपने छूने से पवित्र बना दिया है। यह शेर ज़ाहिरी दिखावे और पाखंड को नकारते हुए दिल की सच्ची पवित्रता को सबसे ऊँचा दर्जा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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