तार-ए-नफ़स तो है अगर ऐ पंजा-ए-जुनूँ कोई गले में तार-ए-गिरेबाँ नहीं रहा

“Even if no thread of collar is left about my neck, O claw of madness, the thread of breath still remains for you to tear.”

— ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
अर्थ

ऐ दीवानगी के पंजे, अगर मेरे गले में फाड़ने के लिए गिरेबान का कोई धागा बाकी नहीं रहा है, तो क्या हुआ, अभी साँस का धागा तो मौजूद है।

विस्तार

उर्दू शायरी में दीवानगी की इंतिहा पर अपने गिरेबाँ को तार-तार कर लेना एक मशहूर अलामत है। आशिक़ यहाँ अपने ही 'जुनून के पंजे' से मुख़ातब होकर कहता है कि अगर फटे कुर्ते में अब नोचने के लिए कोई धागा नहीं बचा, तो मायूस मत हो। अभी गले में सांसों की डोर (तार-ए-नफ़स) सलामत है, जिसे यह जुनून चाहे तो तोड़ सकता है—यानी यह बेपनाह इश्क़ अब जान लेकर ही मानेगा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.