છે શોખ મિજમાનો ફકીરોના ન યા! કૈં ઝિદ કરૂ દરવાનથી યા ના? સનમ!

“Is there a passion for being a fakir's guest, or not, oh!Should I insist with the doorkeeper or not, my beloved?”

— कलाપી
अर्थ

क्या फ़कीरों के मेहमान बनने का शौक है या नहीं? हे सनम, क्या मैं दरबान से ज़िद करूँ या नहीं?

विस्तार

यह शेर एक प्रेमी की व्याकुलता को दर्शाता है, जो अपने महबूब के दरवाज़े पर खड़ा है, पर दरबान ने उसे रोक रखा है। प्रेमी पूछता है, "क्या मेहमानों का स्वागत करने का रिवाज नहीं है, जैसे एक फकीर भी अपने यहाँ आए अतिथि का सत्कार करता है?" वह इशारा करता है कि जब एक सामान्य फकीर भी मेहमाननवाज़ी करता है, तो उसे क्यों रोका जा रहा है। फिर, सीधे अपने प्रियतम को संबोधित करते हुए वह पूछता है, "ऐ सनम, क्या मुझे दरबान से ज़िद करनी चाहिए और अंदर आने की कोशिश करनी चाहिए, या मुझे वापस चले जाना चाहिए?" यह एक हृदयविदारक याचना है, जो प्रिय के प्रेम और स्वीकार्यता की परीक्षा ले रही है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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