“If one is madly in love, or helplessly weak,Is he allowed in your court, O beloved, or not, I seek?”
हे सनम, यदि कोई दीवाना मस्त हो या लाचार हो, तो क्या उसे आपके दरबार में अनुमति है या नहीं?
यह शेर महबूब से एक मार्मिक सवाल पूछता है। शायर पूछता है कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति, जो प्यार में पूरी तरह दीवाना और मस्त हो, या फिर प्यार में बिल्कुल लाचार और बेबस हो गया हो, उसे आपके दरबार में, यानी आपकी मौजूदगी में आने की इजाज़त मिलनी चाहिए या नहीं, ऐ मेरे सनम? यह एक ऐसी विनती है जहाँ प्रेमी अपनी तीव्र भावनाओं और अपनी असहाय अवस्था के बावजूद महबूब के करीब रहने की अनुमति चाहता है। यह दर्शाता है कि प्रेम में डूबकर व्यक्ति चाहे कैसा भी हो जाए, वह अपने प्रिय के पास ही रहना चाहता है।
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