આ વાય ફજ્ર તણી હવા, મુજ રાત વીતી મુફતમાં; દિલદાર આ ઊઠે જવા, એ બે સુખન બોલી નહીં.

“The dawn's air now blows, my night passed in vain;My beloved rises to leave, she uttered not two words.”

— कलाપી
अर्थ

भोर की हवा चल रही है, मेरी रात व्यर्थ बीत गई है; प्रियतम जाने के लिए उठ रही है, उसने दो शब्द भी नहीं कहे।

विस्तार

यह शेर भोर के समय होने वाले एक गहरे दुख और अनकहे शब्दों की कहानी कहता है। शायर अपनी रात के बर्बाद होने का अफ़सोस करता है, जैसे ही सुबह की हवा चलती है। वह कहता है कि उसकी रात 'मुफ्त में' बीत गई, यानी बिना किसी सार्थक संवाद के, बिना कुछ पाए। दिलदार, यानी महबूब, अब जाने के लिए उठ रहा है, और सबसे दुखद बात यह है कि उन्होंने शायर से एक भी लफ़्ज़ नहीं कहा। यह पंक्तियाँ अधूरे प्यार और उस उदासी को बख़ूबी बयान करती हैं, जो एक रात महबूब के साथ बिताने के बाद भी, जब कोई भावनात्मक जुड़ाव या बातचीत नहीं हो पाती, तब महसूस होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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पाठ
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