“I tire of oppression, where no acquaintance is nigh;There, fresh it rises, that intoxication of Thine!”
जब मैं ज़ुल्म से थक जाता हूँ और कोई परिचित पास नहीं होता, तब वहीं आपकी वह दिव्य मस्ती (नशा) ताज़ी होकर मुझपर छा जाती है।
यह शेर खूबसूरती से बताता है कि कैसे मुश्किल समय में भी सहारा और ताकत मिलती है। कवि कहते हैं कि वे जुल्म और अकेलेपन से पूरी तरह थक चुके हैं, जहाँ कोई परिचित चेहरा भी आसपास नहीं है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि ठीक इसी थकान और निराशा के पल में, उनकी प्रेमिका या प्रिय की मादक याद या भावना एक ताजी लहर की तरह उठकर उन्हें फिर से जीवंत कर देती है। इसका मतलब है कि प्रिय के प्रेम और आकर्षण की मात्र कल्पना या स्मृति ही एक शक्तिशाली संजीवनी का काम करती है, जब बाकी सब कुछ खोया और निराश करने वाला लगता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
