કિસ્મત કરાવે ભૂલ તે ભૂલો કરી નાખું બધી; છે આખરે તો એકલી ને એ જ યાદી આપની.

“Whatever mistakes fate may cause, I commit them all indeed;For in the end, alone it stands, that very memory of yours, my creed.”

— कलाપી
अर्थ

किस्मत जो भी गलतियाँ करवाती है, मैं वह सारी गलतियाँ कर देता हूँ। क्योंकि अंत में आपकी याद ही अकेली रह जाती है।

विस्तार

यह दोहा भाग्य के प्रति गहरी स्वीकार्यता को दर्शाता है। कवि कहते हैं कि यदि किस्मत उन्हें गलतियाँ करने पर मजबूर करती है, तो वे वे सारी गलतियाँ करने को तैयार हैं। इस त्याग का कारण बहुत ही मार्मिक है: आखिर में केवल अकेलापन ही बचता है, और उस शांत अकेलेपन में, सबसे अनमोल चीज़ किसी अपने की यादें होती हैं। इसका अर्थ है कि हर गलती, भाग्य का हर मोड़, अंततः उन अनमोल यादों को संजोने की ओर ले जाता है, जिससे हर त्रुटि भी स्थायी यादों की ओर एक मीठी-कड़वी यात्रा का हिस्सा बन जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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