“With the water, its blooming flowers ascend;With water, mercy does not descend, it truly graces the water.”
जैसे पानी के साथ उसके खिले हुए फूल ऊपर उठते हैं, वैसे ही दया पानी के साथ नीचे नहीं उतरती, बल्कि पानी को शोभा देती है।
यह दोहा दाता और जिसे वह ऊपर उठाता है, उनके रिश्ते को खूबसूरती से दर्शाता है। यह कहता है कि जिस प्रकार जल-पुष्प, जैसे कमल, पानी के साथ ऊपर उठते और खिलते हैं, वे पानी के घटने पर नीचे नहीं उतरते। फिर यह श्लोक कहता है कि जल को वास्तव में दया ही शोभा देती है। इसका अर्थ है कि एक सच्चा दाता दूसरों को फलने-फूलने और सम्मान से खड़ा रहने में मदद करता है। परिस्थितियाँ बदलने पर या जब दाता का प्रभाव कम होता हुआ प्रतीत हो, तब भी उसने जिसे पोषित किया है, वह अपनी गरिमा और स्थान बनाए रखता है। यह देने और बनाए रखने के उच्च गुण पर प्रकाश डालता है, यह सुझाव देता है कि समर्थन का मूल सार ही दयालुता और करुणा का कार्य है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
