જ્યાં જ્યાં ચડાવો ત્યાં ચડું છું હાથ હાથે લેઈને, એ હાથ છૂટી ન જવાને દમબદમ હોજો રહમ.

“Wherever you bid me ascend, there I climb, hand in hand with thee,May mercy flow unceasingly, lest this hand ever part from me.”

— कलाપી
अर्थ

जहाँ भी आप मुझे चढ़ाते हैं, मैं आपका हाथ थामकर चढ़ता हूँ। वह हाथ छूट न जाए, इसके लिए निरंतर दया बनाए रखें।

विस्तार

यह प्यारा दोहा पूर्ण विश्वास और समर्पण की बात करता है। यह कहता है, 'आप मुझे जहाँ भी ऊपर ले जाते हैं, मैं आपका हाथ थामकर वहीं जाता हूँ।' यह गहरी भक्ति और किसी भी दिशा में, जहाँ प्रिय या ईश्वर मार्गदर्शक हों, जाने की इच्छा व्यक्त करता है। दूसरी पंक्ति एक हार्दिक प्रार्थना है: 'लगातार दया बनी रहे, ताकि यह हाथ कभी न छूटे।' यह उस अनमोल संबंध को बनाए रखने, मार्गदर्शक हाथ को कभी न खोने की गुहार है, जीवन के सफर में निरंतर दैवीय कृपा की तलाश में रहने की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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