कबीर कलि खोटी भई , मुनियर मिलै न कोइ। लालच लोभी मसकरा , तिनकूँ आदर होइ॥ — कबीर

कबीर कलि खोटी भई , मुनियर मिलै न कोइ। लालच लोभी मसकरा , तिनकूँ आदर होइ॥

“Kabir, the false age has arrived, no one can be found who is truly pure. The greedy, covetous person, to them no respect is due.”

— कबीर

अर्थ

कबीर कहते हैं कि यह कलियुग झूठा है, जिसमें कोई सच्चा और पवित्र व्यक्ति नहीं मिलता। लालची और लोभी व्यक्ति को कोई आदर नहीं करना चाहिए।

विस्तार

कबीरदास जी कहते हैं कि यह युग बड़ा ही भ्रष्ट हो गया है, जहाँ सच्चे और निर्मल मन वाले लोग मिलना दुर्लभ हो गया है। आज तो उन लोगों का ही सम्मान होता है जो लालची, लोभी और सिर्फ दिखावा करने वाले होते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता से ही असली सम्मान प्राप्त होता है। यह एक मार्मिक टिप्पणी है कि कैसे संसार में सच्ची अच्छाई को पहचानना मुश्किल हो गया है।

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