सुमरित सुरत जगाय कर , मुख के कछु न बोल। बाहर का पट बन्द कर , अन्दर का पट खोल॥ 67॥
“Awaken the heart with the remembrance of the beloved, yet let the lips remain silent. Close the outer curtain, and open the inner one.”
— कबीर
अर्थ
सुमरित सूरत से हृदय को जगाओ, पर मुख से कुछ मत कहो। बाहरी आवरण को बंद करो और आंतरिक को खोल दो।
विस्तार
कबीरदास जी हमें यहाँ सिखा रहे हैं कि सच्ची भक्ति सिर्फ दिखावे में नहीं, बल्कि मन की गहराई में छुपी है। वे कहते हैं कि हमें बाहरी दुनिया के लिए किए गए दिखावों को बंद करके, अपने भीतर के द्वार खोलने चाहिए। अपने प्रिय की याद को चुपचाप मन में जगाए रखना ही असली साधना है, क्योंकि यह आत्मा की एक शांत क्रांति है।
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