सुमिरन में मन लाइए , जैसे नाद कुरंग। कहैं कबीर बिसरे नहीं , प्रान तजे तेहि संग॥

“Bring your mind into remembrance, like the sound of a flute. Kabir says, do not forget, even after leaving the body.”

— कबीर
अर्थ

सुमिरन में मन को ऐसे लगाओ, जैसे मन को बांसुरी की ध्वनि में लगाना चाहिए। कबीर कहते हैं कि जीवन छोड़कर जाने के बाद भी उसका स्मरण मत करना।

विस्तार

कबीर दास जी हमें सिखाते हैं कि अपने मन को ईश्वर की याद में इस तरह लगाना चाहिए, जैसे एक हिरण किसी मधुर नाद (ध्वनि) में पूरी तरह लीन हो जाता है। यह याद इतनी गहरी और पक्की होनी चाहिए कि इसे कभी भूला न जाए। वे कहते हैं कि यह सुमिरन इतना अटल हो कि प्राण त्यागने के बाद भी यह हमारे साथ रहे। यह हमें उस अनवरत जुड़ाव की ओर ले जाता है जो शरीर के मिटने पर भी अमर रहता है।

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