दुर्बल को न सताइए , जाकि मोटी हाय। बिना जीव की हाय से , लोहा भस्म हो जाय॥ 31॥
“Do not torment the weak, lest their faint curse be uttered. For even with a curse without life, iron turns to ash.”
— कबीर
अर्थ
कमजोर को परेशान न करें, नहीं तो उनका हल्का सा श्राप निकल सकता है। क्योंकि बिना जान के श्राप से भी लोहा भस्म हो सकता है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में हमें सीख देते हैं कि कभी किसी कमजोर व्यक्ति को सताना नहीं चाहिए। उनकी आह, जो देखने में भले ही मामूली लगे, उसमें इतनी शक्ति होती है कि वह लोहे को भी राख में बदल सकती है। यहाँ लोहा सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि अहंकार और क्रूरता का प्रतीक है, जिसे एक बेबस की आह जलाकर भस्म कर सकती है। यह हमें बताता है कि जीवन में दया और करुणा का कितना महत्व है और कमजोरों को सताना कितना भारी पड़ सकता है।
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