क्या भरोसा देह का , बिनस जात छिन मांह। साँस-सांस सुमिरन करो और यतन कुछ नांह॥ 29॥
“What guarantee does the body hold, it perishes in a moment. Remember God with every breath, and do nothing else.”
— कबीर
अर्थ
शरीर का क्या भरोसा, यह क्षण भर में नष्ट हो जाएगा। हर साँस के साथ ईश्वर का स्मरण करो और और कोई प्रयास मत करो।
विस्तार
अरे दोस्त, कबीर दास जी इस दोहे में हमें जीवन की सच्चाई से रूबरू करा रहे हैं। वो कहते हैं कि इस शरीर पर भला क्या भरोसा करना, ये तो पलक झपकते ही मिट्टी में मिल जाता है। इसीलिए, हमें हर साँस के साथ सिर्फ ईश्वर को याद करना चाहिए और बाकी सब व्यर्थ के जतन छोड़ देने चाहिए। ये हमें समझाता है कि असली पूंजी तो बस ईश्वर का नाम ही है, बाकी सब क्षणभंगुर है।
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