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आया था किस काम को , तु सोया चादर तान। सुरत सम्भाल ए गाफिल , अपना आप पहचान॥ 28॥

What business did you come for, while wrapped in the sheets and asleep? O heedless one, gather your composure and recognize yourself.

कबीर
अर्थ

तू किस काम से आया, जब चादर में सोया हुआ है। हे लापरवाह, अपनी सूरत संवार और खुद को पहचान।

विस्तार

कबीर इस दोहे में हमसे बड़े प्यार से पूछते हैं कि जब हम दुनियावी मोह-माया और अज्ञान की गहरी नींद में सोए हुए हैं, तो जीवन में आने का हमारा असली मकसद क्या है। 'चादर तानकर सोना' यहाँ हमारी लापरवाह और बेखबर हालत को दर्शाता है। वे हमें झकझोरते हुए कह रहे हैं कि उठो, होश संभालो और अपनी आत्मा को पहचानो, क्योंकि इसी में हमारा सच्चा कल्याण है। यह एक सुंदर और गहरी याद दिलाता है कि हमें अपनी यात्रा के वास्तविक उद्देश्य को कभी नहीं भूलना चाहिए।

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