फल कारण सेवा करे , करे न मन से काम। कहे कबीर सेवक नहीं , चहै चौगुना दाम॥

“The servant performs service for the reward, not from the heart's desire. Kabir says, 'The servant is not sought; what is desired is multiplied wealth.'”

— कबीर
अर्थ

फल के कारण सेवा करे, मन से नहीं। शायर कबीर कहते हैं कि सेवक की नहीं, बल्कि चौगुना धन की इच्छा होती है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ कितनी गहरी बात कह रहे हैं! वो कहते हैं कि जो इंसान सिर्फ फल या इनाम के लिए सेवा करता है, और जिसका मन काम में नहीं लगता, वो सच्चा सेवक नहीं हो सकता। ऐसे लोग तो बस अपने फायदे और चौगुने दाम की उम्मीद में लगे रहते हैं, जैसे कोई सौदा कर रहे हों। ये हमें सिखाता है कि असली सेवा तो बिना किसी लालच के, पूरे मन से की जाती है, वरना वो बस एक लेन-देन बनकर रह जाती है।

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