बाहर क्या दिखलाए , अनन्तर जपिए राम। कहा काज संसार से , तुझे धनी से काम॥

“What should be shown outside, repeat the name of Rama within. What business is there with the world, or with the rich?”

— कबीर
अर्थ

बाहर दिखावे पर ध्यान न दो, मन के भीतर राम का नाम जपते रहो। संसार के काम और धनवानों से कोई लेना-देना नहीं है।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में कितनी प्यारी बात कहते हैं! वे हमें समझाते हैं कि बाहरी दिखावा करके क्या मिलेगा, असली भक्ति तो अपने भीतर राम नाम जपने में है। दुनिया के झमेलों और धन-दौलत के पीछे भागने से बेहतर है कि हम अपने सच्चे 'धनी' यानी ईश्वर से रिश्ता जोड़ें। यह हमें सिखाता है कि सच्ची दौलत मन की शांति और ईश्वर से जुड़ने में है, न कि बाहरी चकाचौंध में।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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