Sukhan AI
ज्यों तिल मांही तेल है , ज्यों चकमक में आग। तेरा सांई तुझमें , बस जाग सके तो जाग॥ 69॥

As oil is to sesame seeds, as fire is to flint. Your divine self is within you; if only you could awaken to it, then awaken.

कबीर
अर्थ

जैसे तिल में महत्ता तेल की है, और चकमक में आग की। तेरा सामी (स्वयं) तुझमें है; यदि तू जाग सके तो जाग।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में कितनी ख़ूबसूरती से समझाते हैं कि जैसे तिल में तेल और चकमक पत्थर में आग छिपी होती है, वैसे ही हमारा ईश्वर, हमारी आत्मा, हमारे भीतर ही वास करती है। हमें उसे कहीं बाहर खोजने की ज़रूरत नहीं है। बस, ज़रूरत है अपनी भीतर की आँखें खोलने की, खुद को पहचानने की। अगर हम इस सच्चाई को समझकर जाग सकें, तो जीवन का सबसे बड़ा रहस्य खुल जाता है।

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पाठ
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