सुमरित सुरत जगाय कर , मुख के कछु न बोल। बाहर का पट बन्द कर , अन्दर का पट खोल॥

“Awakening the remembered spirit with your hands, yet speaking nothing from your lips. Closing the outer curtain, and opening the inner one.”

— कबीर
अर्थ

सुमरित सूरत को हाथों से जगाना, पर मुख से कुछ न बोलना। बाहर के पर्दे को बंद करना और अंदर के पर्दे को खोल देना।

विस्तार

यह कबीर का दोहा हमें बताता है कि सच्ची आध्यात्मिक यात्रा अंदर की ओर होती है। 'बाहर का पट बंद करना' मतलब दुनिया के शोर और बाहरी दिखावे से खुद को दूर करना, जबकि 'अंदर का पट खोलना' अपनी आत्मा, अपनी गहरी चेतना और उस परमात्मा से जुड़ना है। यहाँ कबीर हमें भीतर की शांति और उस दिव्य याद को जगाने की सलाह दे रहे हैं, जिसके लिए शब्दों की नहीं, बल्कि गहरे मौन की आवश्यकता होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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