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अन्तर्यामी एक तुम , आत्मा के आधार। जो तुम छोड़ो हाथ तो , कौन उतारे पार॥ 62॥

You alone, the inner Self, are the foundation of the soul. If you abandon your hand, who will ferry across?

कबीर
अर्थ

अन्तर्यामी यानी भीतर रहने वाले, तुम ही आत्मा का आधार हो। यदि तुम अपना हाथ छोड़ दोगे, तो कौन तुम्हें पार लगाएगा।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में ईश्वर पर हमारी गहरी आस्था और निर्भरता को बहुत खूबसूरती से समझाते हैं। वे कहते हैं कि हे प्रभु, आप ही हमारी अंतरात्मा में बसने वाले और हमारी आत्मा के असली आधार हैं। जीवन एक भवसागर जैसा है जिसे पार करना बड़ा मुश्किल है, और अगर आप ही हमारा हाथ छोड़ दें तो हमें कौन उस पार ले जाएगा? यह हमें याद दिलाता है कि जीवन की हर चुनौती में ईश्वर का साथ ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति और सहारा है।

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