“The world is a deceitful, dark realm, where no one listens to words. Where should I speak the truth, if the world is my enemy?”
कली कहता है कि यह जग झूठा और अंधकारमय है, जहाँ कोई भी शब्द नहीं मानता। वह पूछता है कि यदि संसार ही शत्रु है, तो वह सच कहाँ कहेगा।
यह दोहा कबीरदास जी के मन की गहरी निराशा और सत्य को बनाए रखने की चुनौती को दर्शाता है। वे कहते हैं कि यह संसार तो कपटी और अंधा है, जहाँ कोई सच्ची बात सुनना ही नहीं चाहता। ऐसे में सच्चा आईना (सत्य) कहाँ दिखाया जाए, जब पूरी दुनिया ही बैरी बनी बैठी हो? यह हमें भीतर झाँकने और अपनी सच्चाई को बाहरी दुनिया की स्वीकृति के बिना भी थामे रखने की प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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