गुरुवा तो घर फिरे , दीक्षा हमारी लेह। कै बूड़ौ कै ऊबरो , टका परदानी देह॥

“Our initiation has wandered to the house of Guruva; what will the old woman and the young woman give, or what will the gift be given for a small coin?”

— कबीर
अर्थ

गुरुवा तो घर फिरे, दीक्षा हमारी लेह। कै बूड़ौ कै ऊबरो, टका परदानी देह॥ इसका शाब्दिक अर्थ है कि हमारी दीक्षा गुरुवा के घर भटक गई है। चाहे बूढ़ी औरत दे या जवान औरत, एक छोटे से सिक्के के लिए क्या भेंट दी जाएगी।

विस्तार

कबीर इस दोहे में आध्यात्मिकता के बाजारीकरण पर करारा प्रहार करते हैं। वे समझाते हैं कि लोग गुरुवा के घर दीक्षा लेने तो जाते हैं, पर इसे एक वस्तु की तरह देखते हैं, जिसे कुछ दान या एक छोटे से सिक्के के बदले खरीदा जा सकता है। असल में, सच्ची आध्यात्मिक सीख और ज्ञान किसी कीमत पर नहीं खरीदा जा सकता; यह तो आंतरिक खोज और समर्पण का विषय है, जो सभी भौतिक लेन-देन से परे है। कबीरदास जी हमें याद दिलाते हैं कि वास्तविक ज्ञान अनमोल है और उसे कभी भी बेचा या खरीदा नहीं जा सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev96 / 7