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गुरु नाम है गम्य का , शीष सीख ले सोय। बिनु पद बिनु मरजाद नर , गुरु शीष नहिं कोय॥ 498॥

The name of the Guru is the destination; learn it from him, O seeker. A person without status or standing, truly has no Guru.

कबीर
अर्थ

गुरु का नाम ही अंतिम गंतव्य है; हे साधक, इसे उनसे सीख लो। ऐसा व्यक्ति जिसका कोई पद या सम्मान नहीं है, वास्तव में उसका कोई गुरु नहीं होता।

विस्तार

गुरु का नाम ही दरअसल वो रास्ता और मंज़िल है जहाँ हमें पहुँचना है, और इस गहरे भेद को हे जिज्ञासु, अपने गुरु से ही जानो। कबीर दास जी यहाँ कहते हैं कि जो इंसान मर्यादा और सही दिशा के बिना भटक रहा है, वो न तो किसी गुरु का सच्चा शिष्य बन पाता है और न ही उसका कोई सच्चा गुरु होता है। इसका मतलब है कि गुरु सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि वो पूरी जीवन-दृष्टि और साधना है जिसे हमें अपनाना पड़ता है, जैसे नदी अपनी धारा में बहकर ही सागर तक पहुँचती है। गुरु के मार्गदर्शन के बिना हमारी आध्यात्मिक यात्रा अधूरी है, क्योंकि सच्चा ज्ञान और सही राह केवल उनके साथ चलकर ही मिलती है।

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