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ज्ञान समागम प्रेम सुख , दया भक्ति विश्वास। गुरु सेवा ते पाइये , सद्गुरु चरण निवास॥ 448॥

Knowledge's union, love's bliss, compassion, devotion, trust. From serving the Guru, one attains, the dwelling place of the true Guru's feet.

कबीर
अर्थ

ज्ञान के मिलन से प्रेम, सुख, दया, भक्ति और विश्वास प्राप्त होते हैं। सच्चे गुरु की सेवा करने से सद्गुरु के चरणों का निवास प्राप्त होता है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ ज्ञान, प्रेम, दया, भक्ति और विश्वास को एक सुंदर माला के मनके बताते हैं, जो हमारे भीतर के उजाले को जगाते हैं। वे कहते हैं कि ये सारी अनमोल चीज़ें हमें कहीं और नहीं, बल्कि सद्गुरु की सच्ची सेवा से ही मिलती हैं। गुरु की सेवा करके ही हम उनके चरणों में, उनके बताए रास्ते पर चलकर, परम शांति और परमधाम पा सकते हैं। यह हमें अपने भीतर के 'सद्गुरु' से जुड़ने का रास्ता दिखाता है।

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