सिष खांडा गुरु भसकला , चढ़ै शब्द खरसान। शब्द सहै सम्मुख रहै , निपजै शीष सुजान॥ 447॥
“The student's desire for the Guru's brilliance is like a scorching desert. The word (knowledge) endures facing it, and the wise person's head is saved.”
— कबीर
अर्थ
शिष्य का गुरु के तेज के प्रति आकर्षण एक तपते रेगिस्तान जैसा है। शब्द (ज्ञान) इसका सामना करता है और बुद्धिमान व्यक्ति का सिर सुरक्षित रहता है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ शिष्य की गुरु ज्ञान के प्रति तीव्र प्यास को एक तपते रेगिस्तान जैसा बताते हैं। यह तीव्र इच्छा एक चुनौती है, जिसके सामने 'शब्द' यानी सच्चा ज्ञान दृढ़ता से खड़ा रहता है। कवि कहते हैं कि इस ज्ञान को मजबूती से थामे रखने और चुनौतियों का सामना करने से ही एक समझदार व्यक्ति का विवेक सुरक्षित रहता है और वह उन्नति करता है।
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