Sukhan AI
जो गुरु बसै बनारसी , सीष समुन्दर तीर। एक पलक बिसरे नहीं , जो गुण होय शरीर॥ 437॥

Whosoever resides in Banaras, near the sea of consciousness, never forgets the divine quality that resides within the body.

कबीर
अर्थ

जो बनारस में बसता है, जो चेतना के सागर के किनारे रहता है, वह शरीर में स्थित दिव्य गुण को कभी नहीं भूलता।

विस्तार

कबीर दास जी कहते हैं कि बनारस सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आत्मिक चेतना का केंद्र है, जहाँ ज्ञान का सागर लहराता है। जो शिष्य इस आध्यात्मिक भूमि पर टिक जाता है, वह अपने भीतर मौजूद ईश्वरीय गुणों को कभी भूल नहीं पाता। ये पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हमारी आत्मा में परमात्मा का अंश हमेशा मौजूद है, बस उसे निरंतर याद रखने की ज़रूरत है।

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पाठ
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