गुरु की आज्ञा आवै , गुरु की आज्ञा जाय। कहैं कबीर सो सन्त हैं , आवागमन नशाय॥ 436॥
“The command of the Guru comes, and the command of the Guru departs. Kabir says, 'The saints are those who are free from coming and going.'”
— कबीर
अर्थ
गुरु का आदेश आता है और गुरु का आदेश चला जाता है। कबीर कहते हैं कि सच्चे संत वे हैं जो आने-जाने के बंधनों से मुक्त हैं।
विस्तार
यह दोहा हमें समझाता है कि इस दुनिया में सब कुछ, यहाँ तक कि गुरु के आदेश भी, आते-जाते रहते हैं, कुछ भी स्थायी नहीं है। कबीरदास जी कहते हैं कि सच्चे संत वही हैं जो इस आने-जाने के चक्र, यानी जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो चुके हैं। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन की क्षणभंगुरता को समझते हुए, हमें आत्मा की शाश्वत मुक्ति की ओर बढ़ना चाहिए। ऐसे संत भौतिक संसार की सीमाओं से ऊपर उठकर, एक अविनाशी अवस्था में जीते हैं।
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