कोई एक राखै सावधां , चेतनि पहरै जागि। बस्तर बासन सूँ खिसै , चोर न सकई लागि॥

“Someone keeps a careful watch, the consciousness stays awake. The wealth of the body slips away, the thief cannot take it away.”

— कबीर
अर्थ

कोई एक व्यक्ति सावधानी से रखवाली करता है, और चेतना जागृत रहती है। शरीर का धन फिसल जाता है, जिसे चोर नहीं ले जा सकता।

विस्तार

कबीर जी इस प्यारे से दोहे में हमें ज़िंदगी का एक गहरा सबक सिखा रहे हैं। वो कहते हैं कि जब हम भीतर से हमेशा सावधान और जागरूक रहते हैं, तो हमारी चेतना ही हमारी सबसे बड़ी पहरेदार बन जाती है। इस दुनिया की सारी भौतिक चीज़ें, यहाँ तक कि हमारे शरीर की सुंदरता या शक्ति भी, समय के साथ अपने आप फिसल जाती है, इन्हें कोई चोर आकर नहीं चुराता। असल में, ये चीजें चोरी नहीं होतीं, बल्कि प्रकृति के नियम से स्वयं ही नष्ट हो जाती हैं। इसलिए, कबीर हमें अपनी भीतर की जागरूकता को जगाए रखने और उसकी रक्षा करने पर ज़ोर देते हैं, क्योंकि यही हमारी सच्ची और स्थायी दौलत है।

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