“My dear speech/words, enduring every venture/business. Without a stick and without a protective shield, the whole world weighs/judges it.”
मेरी प्यारी वाणी हर प्रकार के व्यवहार को सहती है। बिना डंडी और बिना पालड़ के, पूरी दुनिया इसका मूल्यांकन करती है।
कबीर दास जी इस दोहे में हमारी वाणी की अद्भुत शक्ति के बारे में बताते हैं, मानो हमारी बातें एक व्यापारी की तरह हों। वे कहते हैं कि हमारे शब्द बिना किसी डंडी या तराजू के पलड़े के ही पूरे संसार को तौल लेते हैं। इसका मतलब है कि हमारी वाणी की अपनी एक अलग ताक़त है, जो बिना किसी बाहरी सहारे या दिखावे के ही अपनी सच्चाई और प्रभाव से परखी जाती है। यह हमें सिखाता है कि हमारे बोले गए शब्दों में कितना गहरा असर होता है और वे कैसे दुनिया में अपनी जगह बनाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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