जिसहि न कोई विसहि तू , जिस तू तिस सब कोई। दरिगह तेरी सांइयाँ , जा मरूम कोइ होइ॥ 412॥
“Whom you do not remember, or whom you remember, or anyone else, by your grace, O beloved, let no one perish.”
— कबीर
अर्थ
जिसको आप याद नहीं करते, या जिसे आप याद करते हैं, या कोई और, आपकी कृपा से, हे प्रिय, किसी को न मरना चाहिए।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में ईश्वर की व्यापक दया और करुणा को समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि हे मेरे साईं, चाहे कोई आपको याद करे या न करे, या आप किसी को याद करें या न करें, आपकी कृपा इतनी हो कि किसी को भी भटकना न पड़े या कोई भी दुखी न रहे। यह एक गहरी प्रार्थना है कि ईश्वर अपनी असीम दया से हर जीव को सहारा दें और कोई भी अपनी राह से न भटके। इस प्रकार, कवि हमें सभी के प्रति समान प्रेम और सहानुभूति रखने का संदेश देते हैं।
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