“My mind, like a dead body, has become weak, my body is frail. Then Hari (God) came and laughed, saying, 'Kabir, Kabir.'”
मन मेरा मृत शरीर के समान हो गया है और शरीर दुर्बल हो गया है। तब हरि (भगवान) आए और हँसते हुए बोले, 'कबीर, कबीर।'
कबीर दास जी इस दोहे में कहते हैं कि जब मन सारी इच्छाओं से मुक्त होकर एक मृत शरीर सा निष्क्रिय हो जाए और देह भी कमजोर पड़ जाए, तब साधक स्वयं भगवान के दर्शन का प्रयास नहीं करता। इसके विपरीत, ऐसे निर्मल और विनीत भक्त को ढूंढते हुए स्वयं हरि (ईश्वर) उसके पीछे चले आते हैं। यह बताता है कि सच्ची भक्ति और पूर्ण समर्पण की अवस्था में ईश्वर स्वयं अपने भक्त को पुकारते हुए उसके जीवन में प्रकाश भर देते हैं, मानो भक्त की निष्ठा ने उन्हें आकर्षित कर लिया हो।
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