बाजीगर का बांदरा , ऐसा जीव मन के साथ। नाना नाच दिखाय कर , राखे अपने साथ॥ 41॥
“The monkey of the street performer, such a creature of the mind, Showing many dances, it keeps itself with us.”
— कबीर
अर्थ
बाजीगर के बांदरे जैसा यह जीव मन के साथ रहता है, जो अनेक नृत्यों का प्रदर्शन करके स्वयं को हमारे साथ बनाए रखता है।
विस्तार
कबीरदास जी ने इस दोहे में हमारे मन की चंचलता को मदारी के बंदर से बड़ी खूबसूरती से समझाया है। जैसे वह बंदर नए-नए नाच दिखाता है, वैसे ही हमारा मन भी लगातार तरह-तरह के विचार, भावनाएँ और इच्छाएँ पैदा करता रहता है। यह मन एक ऐसा साथी है जो हमेशा हमारे साथ रहता है, कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता, और अपनी शरारतों से हमें व्यस्त रखता है। यह एक गहरा अवलोकन है कि कैसे हमारा मन एक नटखट बंदर की तरह सदा हमारे भीतर ही खेलता रहता है।
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