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सुखिया सब संसार है , खावै और सोवेदुखिया दास कबीर है , जागै अरु रौवे261

The whole world is blissful, it eats and sleeps. But the servant Kabir is sorrowful, he remains awake and cries.

कबीर
अर्थ

सारा संसार सुखी है, वह खाता और सोता है। लेकिन दास कबीर दुखी है, वह जागता और रोता है।

विस्तार

कबीर दास जी कहते हैं कि यह सारा संसार माया के भ्रम में लिपटा हुआ है, जो बस खाने-पीने और सोने में ही अपनी खुशी ढूंढता है। लेकिन कबीर जैसे भक्त, जो आध्यात्मिक सत्य को जानते हैं, उन्हें इस संसार की नश्वरता और प्रभु से वियोग का दुख सताता है। इसीलिए वे जागते रहते हैं और अपनी आत्मा के उद्धार के लिए रोते हैं, जो उनकी गहरी अंतर्दृष्टि और प्रेम को दर्शाता है।

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