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रात गंवाई सोय के , दिवस गंवाया खाय। हीरा जन्म अनमोल था , कौंड़ी बदले जाए॥ 230॥

How one wastes the night with sleep, and the day with eating. How the priceless diamond cannot be exchanged for a cowrie shell.

कबीर
अर्थ

रात को नींद में और दिन में खाना बर्बाद करना। हीरा जन्म से अनमोल होता है, जिसे कौड़ी से नहीं बदला जा सकता।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में बताते हैं कि हम रात सोने में और दिन खाने में गँवा देते हैं, जैसे समय को व्यर्थ कर रहे हों। वे हमारे मनुष्य जीवन को एक अनमोल हीरे जैसा बताते हैं, जिसकी कीमत हम नहीं समझ पाते। कवि कहते हैं कि इस कीमती जीवन को हम कौड़ियों के मोल, यानी छोटी-मोटी चीज़ों या आदतों में, यूँ ही बर्बाद कर देते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन कितना बहुमूल्य है और हमें इसे सार्थक बनाना चाहिए।

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