“Do not torment the weak, for their curse is potent. Even the iron can turn to ash from a life's sigh.”
कमजोरों को परेशान न करें, क्योंकि उनका श्राप बहुत शक्तिशाली होता है। बिना जीवन के ही उनकी आह से लोहा भस्म हो सकता है।
यह दोहा हमें सिखाता है कि किसी कमज़ोर को कभी दुख नहीं पहुँचाना चाहिए, क्योंकि उनकी आह में बहुत शक्ति होती है। कबीरदास जी कहते हैं कि जिस प्रकार बिना जान की एक आह भी लोहे को राख बना सकती है, उसी तरह कमज़ोर की पुकार बहुत भारी पड़ सकती है। इसमें गहरी सीख है कि हर व्यक्ति की पीड़ा को समझना और उसका सम्मान करना कितना ज़रूरी है।
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