“What purpose did you come for, while wrapped in your sheet? O heedless one, manage your beauty; recognize yourself.”
तू किस काम से आया, चादर ओढ़कर सो गया। हे लापरवाह, अपनी सुंदरता को संभाल और स्वयं को पहचान।
कबीर दास जी इस दोहे में बड़े प्यार से उस व्यक्ति को जगा रहे हैं जो दुनियावी मोह-माया की चादर तानकर गहरी नींद में सोया हुआ है। वे पूछते हैं कि तुम किस बड़े मकसद से इस संसार में आए थे, और क्यों उसे भूलकर बेखबर पड़े हो। 'ए गाफिल' यानी लापरवाह मन को वे समझाते हैं कि अपनी भीतर की असली 'सुरत' (आत्मा की सुंदरता) को सँभालो और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानो। यह अपने आप को जानने और जागृत होने की एक गहरी पुकार है।
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