माया छाया एक सी , बिरला जाने कोय। भगता के पीछे लगे , सम्मुख भागे सोय॥ 27॥
“Illusion and shadow are one, few realize this truth. One follows devotion's path, the other runs away from it.”
— कबीर
अर्थ
माया और छाया एक समान हैं, और यह बात बहुत कम लोगों को पता है। एक व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर चलता है, जबकि दूसरा उससे दूर भागता है।
विस्तार
कबीरदास जी हमें समझा रहे हैं कि माया और छाया एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जिन्हें बहुत कम लोग ही जान पाते हैं। जैसे परछाई सच नहीं होती, वैसे ही यह संसार भी एक भ्रम है जो हमें बांधे रखता है। कितनी अजीब बात है कि कुछ लोग तो भक्ति के पीछे भागते हैं, पर जब असलियत उनके सामने आती है तो वे उससे कतराने लगते हैं। यह दिखाता है कि हमारी उलझनें अक्सर उस भ्रम की ही देन होती हैं जिसे हम सच मान लेते हैं।
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