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कबीरा खालिक जागिया , और ना जागे कोयजाके विषय विष भरा , दास बन्दगी होय181

Kabiira, the Creator is awake, but no one has awakened. For those whose lives are filled with poison, they become servants and slaves.

कबीर
अर्थ

कबीरा, खालिक जाग गए, और न जागा कोई। जिसके विषय विष भरा, दास बन्दगी होय। इसका अर्थ है कि ईश्वर (खालिक) जाग्रत हैं, लेकिन कोई व्यक्ति नहीं जागा है। जो लोग विषैले विषयों में लगे रहते हैं, वे केवल दास और बंधगी बनकर रह जाते हैं।

विस्तार

कबीरदास जी इस दोहे में बताते हैं कि सृष्टिकर्ता तो सदैव जागृत अवस्था में हैं, परंतु हम इंसान अज्ञानता की नींद में सोए हुए हैं। हमारा मन और जीवन सांसारिक विषयों, यानि मोह-माया के ज़हर से भरा हुआ है। इस ज़हरीले आकर्षण के कारण हम अपनी आध्यात्मिक स्वतंत्रता खो देते हैं। परिणामस्वरूप, हम इन्हीं नश्वर चीज़ों के दास बनकर रह जाते हैं, न कि उस परम सत्य के।

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