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कलि खोटा सजग आंधरा , शब्द न माने कोय। चाहे कहूँ सत आइना , सो जग बैरी होय॥ 178॥

The Kali, the false, the alert, the dark one, obeys no word. If I speak the truth's mirror, the world becomes my enemy.

कबीर
अर्थ

कलि, जो कि झूठी, सचेत और अंधकारमय है, किसी शब्द का पालन नहीं करती। यदि मैं सत्य का आईना दिखाऊँ, तो पूरी दुनिया शत्रु बन जाती है।

विस्तार

कबीर जी यहाँ कलि याने कलियुग की बात कर रहे हैं, जहाँ झूठ और अज्ञानता इतनी फैली है कि कोई भी सच बात सुनना ही नहीं चाहता। वे कहते हैं कि लोग 'सजग आंधरा' हैं, यानी आँखें होते हुए भी जानबूझकर सच से मुँह मोड़ लेते हैं। ऐसे में अगर कोई सच का आईना भी दिखाए, तो यह दुनिया उसे दुश्मन मान लेती है, जो सच बोलने वाले के अकेलेपन को बखूबी दर्शाता है।

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