“Kabira, what is the use of sleeping? Wake up and chant Murari's name. There is only one day for sleeping, spread out your long legs.”
कबीरा, सोने में क्या रखा है, जागकर मुरारी का जाप करो। सोना तो बस एक दिन है, अपने लंबे पैर फैला दो।
कबीर दास जी यहाँ हमें बड़े प्यार से समझा रहे हैं कि क्यों समय बर्बाद करना नींद में, जब जागने और ईश्वर का नाम जपने का मौका है। वे 'सोने' को सिर्फ़ शारीरिक नींद नहीं, बल्कि जीवन की मोह-माया में डूबे रहने और प्रभु को भूल जाने से जोड़ते हैं। कवि कहते हैं कि असली और लंबी नींद तो एक दिन आनी ही है, जब हम हमेशा के लिए पाँव पसार कर शांति से सो जाएंगे। तो फिर, इस जीवन को क्यों न प्रभु सुमिरन में लगाएँ!
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