“The musk resides within the navel, yet the deer searches for it in the forest. Likewise, in every heart resides Rama, yet the world does not see him.”
कस्तूरी तो नाभि में निवास करती है, पर हिरण उसे जंगल में खोजता है। ठीक इसी प्रकार, हर हृदय में राम निवास करते हैं, पर संसार उन्हें नहीं देख पाता।
यह दोहा कस्तूरी मृग के सुंदर बिंब से हमें समझाता है कि जैसे हिरण अपनी नाभि में बसी कस्तूरी की सुगंध को जंगल में भटकते हुए ढूंढता है, ठीक वैसे ही हम इंसान भी ईश्वर को बाहर कहीं तलाशते रहते हैं। कबीर दास जी कहते हैं कि असल में राम या ईश्वर तो हमारे अपने ही भीतर, हर दिल में मौजूद हैं। बस हमें अपनी नज़र बाहर से हटाकर अंदर की ओर मोड़नी है, क्योंकि सच्ची शांति और परमात्मा की खोज का रास्ता भीतर ही है।
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