“Kabir says, 'What is it that you give, as long as this body lasts? When the body is gone, who will remember the body?'”
कबीर कहते हैं कि जब तक यह शरीर है, तुम क्या देते रहोगे? जब शरीर ही न रहेगा, तो कौन शरीर को याद करेगा।
कबीर दास जी यहाँ कितनी गहरी बात समझा रहे हैं, बिलकुल आराम से जैसे कोई दोस्त समझाए! वो कहते हैं कि जब तक ये शरीर है, तब तक तू कुछ ऐसा कर, कुछ दे जो अमर हो – चाहे वो नेकी हो, प्रेम हो या सेवा। क्योंकि ये देह तो आखिर मिट्टी में मिल ही जानी है, राख बन जाएगी, फिर कौन इसे शरीर कहेगा या याद रखेगा? ये हमें याद दिलाता है कि हमारा असल मूल्य भौतिकता में नहीं, बल्कि उन कर्मों में है जो हम अपने जीवनकाल में करते हैं।
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