कहता तो बहूँना मिले , गहना मिला न कोय। सो कहता वह जान दे , जो नहीं गहना कोय॥ 164॥
“If I speak, I will find my sister; if I speak, I find no ornament. If you speak, please let me know, for I have no ornament.”
— कबीर
अर्थ
अगर मैं बोलूँ तो बहन मिले, पर गहना नहीं मिलता। अगर आप बता दें तो, क्योंकि मेरे पास कोई गहना नहीं है।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में बड़ी प्यारी बात कहते हैं। वे कहते हैं कि सिर्फ बातें करने से न तो कोई सच्ची बहन मिलती है और न ही कोई असली गहना। उनका इशारा है कि बाहरी दिखावे या महज़ जुबानी जमा खर्च से हमें कुछ भी सच्चा और स्थायी नहीं मिलता। वे समझाते हैं कि अगर तुम मुझे वह ज्ञान या सच्चाई दे सको जो मेरे पास नहीं है, तो वही मेरे लिए सबसे अनमोल 'गहना' है। यह दोहा हमें सिखाता है कि भीतर की समझ और सच्चा ज्ञान ही सबसे बड़ी दौलत है, न कि ऊपरी दिखावा।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev62 / 10
