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कुटिल बचन सबसे बुरा , जासे होत न हार। साधु वचन जल रूप है , बरसे अम्रत धार॥ 163॥

Deceitful words are the worst, those which never lose. The words of a saint are like water, raining a stream of nectar.

कबीर
अर्थ

कुटिल वचन सबसे बुरे होते हैं, जो कभी हार नहीं मानते। साधु के वचन जल के रूप में होते हैं, जिनमें अमृत की धारा बरसती है।

विस्तार

कबीर यहाँ हमें शब्दों की अद्भुत शक्ति समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि कुटिल और धोखेबाज बातें सबसे बुरी होती हैं, क्योंकि ये मन में घाव कर जाती हैं और कभी हार नहीं मानतीं, यानी इनका असर लंबे समय तक रहता है। इसके विपरीत, साधु-संतों के वचन तो जल की तरह शीतल और पवित्र होते हैं, जो अमृत की धारा बनकर हमारे भीतर शांति और नया जीवन भर देते हैं। ये शब्द आत्मा को शुद्ध कर देते हैं, बिल्कुल एक मीठे झरने की तरह।

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